मज़ा आ गया। इसे कहते हैं वापसी। लगभग ढाई साल बाद मैदान में उतरे लक्ष्मीपति बालाजी ने दिखा दिया की उनमें आज भी उतना ही दम है और उन्हें टीम में लेकर चेन्नई ने कोई गलती नहीं की है। आईपीएल की पहली हैटट्रिक लेकर उन्होनें अपने समर्थकों को खुश कर दिया ।
लगभग साढे तीन साल पहले बालाजी और पठान की जोड़ी ने धमाल मचा दिया था। एक दायें हाथ का बोलर और दूसरा बायें हाथ का, और बल्लेबाजों की नाक में दम कि बनायें तो रन कहाँ बनायें। पर ग्रेग चैपल ने इन दोनों प्रतिभावान बोलरों की प्रतिभा का नास पीट दिया। पठान को बोलर की बजाय बल्लेबाज़ बनाने की कोशिश ने उसका करियर ख़राब कर दिया और उनके उल्टे सीधे तरीकों ("प्रयोगों") ने बालाजी को तो टीम से ही बाहर करवा दिया। उस पर भी हाल वाही ढाक के तीन पात ।
वह तो अच्छा हुआ की चैपल यहाँ से चले गए वरना भारत की क्रिकेट टीम की हालत और भी ख़राब हो जाती।
पर अंत भला तो सब भला। चैपल ("जी"?) चले गए और भारत ने उनके जाने की खुशी ज़ोरदार तरीके से मनाई।
अब बालाजी ने वापस आकर और ऐसी ज़बरदस्त पर्फोर्मैंस देकर अपने समर्थकों में खुशी की लहर बिखेर दी है।
उन्हें मेरी भी बधाई।
Wednesday, May 14, 2008
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5 comments:
बहुत्त खूब
अच्छी रचना। बधाई। ब्लॉग जगत में स्वागत।
हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी टिप्पणियां दें
welcome
---- चुटकी----
राहुल थके
प्रियंका ने
चलाई कार,
अब तो
यह भी है
टीवी लायक
समाचार।
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