Thursday, May 1, 2008

भाई साहब, आज कल खाद्यान्न पर कुछ ज्यादा ही मारा - मारी हो रही है। पता चला है कि दुनिया भर में खाद्यान्न संकट बढ़ता ही जा रहा है। कुछ विश्लेषक तो यहाँ तक कह रहे हैं कि विश्व के पास केवल ४ दिनों का अनाज बाकी है। इस संकट का एक कारण अनाज की बढ़ती मंहगाई भी है।

असल में, भारत में इसकी शुरुआत काफी समय पहले ही हो गई थी, जब भारत सरकार ने वायदा व्यापार में अनाज को शामिल करने की छूट दे दी थी। परन्तु अब समय आ गया है की भारत सरकार अपने इस कदम को वापस खींच ले और वायदा व्यापार में से सभी तरह के अनाजों, दलहनों, तिलहनों, तथा मोटे अनाजों के व्यापार को समाप्त करे वरना देश में भुखमरी की हालत पैदा हो सकती है।

इसके साथ ही सरकार का ये भी दायित्व बनता है कि वो इस बात को सुनिश्चित करे कि गरीब परिवारों को मिलने वाले राशन को ब्लैक में न बेचा जा सके।

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