Friday, May 2, 2008

"आह !!! बड़ी गर्मी है और ऊपर से ये बिजली वाले भी क़यामत ढा रहे हैं। काश भगवान बारिश करवा दे और कुछ राहत मिले। "
हमारे देश में गर्मी का मौसम शुरू होते ही इस प्रकार के जुमले आम हो जाते हैं। कभी तो सर्दी इतनी भयंकर पड़ती है की लोगों जान ले लेती है और कभी गर्मी में चलने वाली लू लोगों के दम खींचने लगती है।
पर कुछ साल पहले तक ये हालात नहीं थे। न तो इतनी गर्मी पड़ती थी और न ही इतनी सर्दी, परन्तु पिछले पाँच - छः सालों से मौसम के हालात गंभीर हो गए हैं। पर अब तो भारत के एक हिस्से में तो भयंकर बाढ़ आती है और दूसरे हिस्से में सूखा लोगों और जानवरों की जान लेनी शुरू कर देता है। कुछ अनुभवी लोग इस बात पर ध्यान दें कि जब से हमारे देश में विदेशी गतिविधियाँ बढ़ी हैं ( विशेषकर पिछली दो सरकारों के कार्यकाल में), हमारे देश का पर्यावरण कुछ ज्यादा ही ख़राब हो गया है। जहाँ तक मेरी समझ में कारण आता है कि इन विदेशी कंपनियों ने अपने पुराने कारखाने, जो उनके देश में बंद करने पड़ रहे थे, को भारत भेजा ताकि उनको भारी नुकसान ना हो। हमारी सरकार भी खुश हो रही थी कि हमारे देश में विदेशी निवेश हो रहा है। उसने ये ध्यान देना कतई ज़रूरी नहीं समझा कि हमारे देश में पुरानी तकनीक की मशीनरी लाकर देश का पर्यावरण ख़राब करने की कोशिश हो रही है। इन कंपनियों ने अपने पुराने कारखानों को यहाँ ( भारत में) लगाकर यहाँ के स्रोतों का शोषण किया और इस प्रदूषण का सेहरा भारत के नाम बंधा।
काश !! हमारी सरकार में कुछ ऐसे लोग न बैठे होते जो अपने फायदे के लिए भारत को होने वाले नुकसान से अपनी आँखें ना मूँद लेते। रही सही कसर हमारी सरकारी नीतियों और हम लोगों ने पूरी कर दी है। हम लोगों ने जानते - बूझते अपने पर्यावरण ख़ुद ख़राब करने में कोई कसार नहीं छोडी। जहाँ चाह वहां के पेड़ काट डाले, नदियों को प्रदूषित कर दिया, समय बचाने के नाम पर वाहनों का जबरदस्त जखीरा खड़ा कर दिया और प्रदूषण पैदा करने वाले पाँचवे नम्बर के देश ( लिंक १ और लिंक दो ) के रूप में अपने देश को खड़ा कर दिया। परन्तु चिंता की कोई बात नहीं, हमारे देश के कुछ अमीर लोगों ने तो ठंडी विदेशी जगहों को घूमने का कार्यक्रम भी बना लिया होगा। आख़िर इस देश के गरीब लोगों को जिंदगी जीने के लिए कमाना भी ज़रूरी है। उनका तो रोज़ का कुआँ खोदना और रोज़ का पानी पीना।
अब भी समय है। हम लोगों को चेतना होगा, हमें ये वचन लेना होगा कि हम कम से कम प्रदूषण फैलाएंगे और अधिक से अधिक पेड़ पौधों को लगाकर प्रदूषण कम करने का प्रयत्न करेंगे।

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